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2/07/2026

UPSC 2026 Notification Out: सीटें कम, चयन और कठिन – पढ़ें पूरी खबर

UPSC CSE 2026: 933 पदों की अधिसूचना जारी, उम्मीदवारों के लिए मुकाबला और कड़ा


नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा-2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस वर्ष कुल 933 पद घोषित किए गए हैं। पदों की संख्या में कमी को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह परीक्षा पहले से ही देश की सबसे कठिन प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में मानी जाती है।

पिछले वर्षों की तुलना में सीटें घटने से चयन की संभावना और सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब कट-ऑफ बढ़ सकती है और अंतिम चयन सूची में स्थान बनाना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहेगा।


UPSC 2026 Notification Out
UPSC 2026 Notification Out



आवेदन और परीक्षा तिथियाँ


  • आवेदन शुरू: फरवरी 2026

  • आवेदन की अंतिम तिथि: 24 फरवरी 2026

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): 24 मई 2026

  • मुख्य परीक्षा (Mains): अगस्त 2026


आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं। स्नातक (Graduation) पास उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए पात्र हैं।


क्या बदला इस बार


इस बार सिर्फ वैकेंसी कम नहीं हुई, बल्कि कुछ नियम भी कड़े किए गए हैं।

  • पहले से चयनित कुछ सेवाओं के अधिकारियों के लिए दोबारा परीक्षा देना सीमित किया गया है

  • सत्यापन प्रक्रिया अधिक डिजिटल और सख्त की गई है

  • पहचान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी जांच प्रणाली जोड़ी गई है

इसका उद्देश्य फर्जी अभ्यर्थियों और अनुचित तरीकों को रोकना बताया जा रहा है।


अभ्यर्थियों पर असर


सीटें कम होने का सीधा असर प्रतियोगिता पर पड़ेगा:

  • चयन अनुपात घटेगा

  • रैंक पाने के लिए अधिक अंक आवश्यक हो सकते हैं

  • तैयारी में मानसिक दबाव बढ़ सकता है

कई विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि उम्मीदवार केवल एक विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक करियर योजनाएँ भी रखें, क्योंकि कम सीटों के कारण अच्छे प्रदर्शन के बावजूद चयन छूट सकता है।


परीक्षा पैटर्न


परीक्षा का ढांचा पहले जैसा ही रहेगा:

  1. प्रारंभिक परीक्षा

  2. मुख्य परीक्षा

  3. साक्षात्कार (Interview)

कोई बड़ा बदलाव पाठ्यक्रम में नहीं किया गया है, लेकिन प्रतिस्पर्धा का स्तर अधिक कठोर होने की संभावना है।


निष्कर्ष

UPSC CSE 2026 की अधिसूचना से स्पष्ट है कि सिविल सेवा परीक्षा अब और अधिक प्रतिस्पर्धी हो रही है। जहां पारदर्शिता और सख्ती बढ़ेगी, वहीं उम्मीदवारों के लिए चयन का मार्ग कठिन हो सकता है। कम पदों के कारण कई योग्य अभ्यर्थियों को भी अवसर नहीं मिल पाएगा, इसलिए बेहतर रणनीति और दीर्घकालिक तैयारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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